सरकार के शराब की दुकानों को खोले जाने के निर्णय पर चौतरफा विरोध

उत्तराखंड में विभिन्न संगठनों ने लॉक डाउन में प्रदेश सरकार के शराब की दुकानों को खोले जाने के निर्णय का जहाँ कड़े शब्दों में विरोध जताया वही दूसरी तरफ देवाल ( चमोली) में शराब विक्री का विरोध कर रहे देवाल ब्लॉक खंड के ब्लॉक प्रमुख दर्शन दानू व अन्य स्थानीय लोगो की गिरफ्तारी को प्रजातांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बताया, जनता के द्वारा चुने गए पंचायती राज व्यवस्था में चुने गए जनप्रतिनिधियों वो भी विकास खंड के प्रथम नागरिक ब्लॉक प्रमुख को पुलिस प्रशासन द्वारा गिरफ्तार किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

दिनाँक 8 मई को गरुड़ सिविल सोसाइटी द्वारा आहूत वीडिओ कांफ्रेंस द्वारा आयोजित चर्चा के शामिल सामजिक कार्यकताओं, विद्वान अधिवक्तागणों ने सरकार के निर्णय को जनविरोधी निर्णय करार दिया।

उत्तराखंड हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी पी नौटियाल ने कहा कि एक तरफ सरकार 29 अगस्त 2019 को डीके जोशी वनाम राज्य व अन्य में हाई कोर्ट के दिये गए फैसले का सम्मान करने के वजाय उसके विपरीत कार्य कर रही है.
29 अगस्त 2019 को उत्तराखंड उच्च न्यायालय नैनीताल ने मद्यनिषेध संबंधी निर्देश जो राज्य सरकार को दिए है वो निम्न प्रकार से हैं-

  1. आबकारी अधिनियम की धारा 37क के अनुपालन में चरणबद्घ मद्यनिषेध प्रसार हेतु 6 माह के भीतर नीति बनाएं
  2. राज्य में संचालित सभी शराब की दुकानों,बार आदि का 2 महीने के भीतर मुवायना कर सुनिश्चित करें कि हर शराब की दुकान व बार संचालक ने IP Address युक्त सीसीटीवीकैमरे लगाए हो
  3. जिन्होंने शराब की दुकान व बार मे उक्त कैमरे नही लगाएं हो उन दोषियों के खिलाप तुरंत कार्यवाही करें
    4.राज्य सरकार सीसीटीवी फुटेज की नियमित निगरानी हेतु ऐसा तंत्र विकसित करे ताकि यह सुनिश्चित किया जाय कि 21 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को शराब न बेची जा रही हो
  4. अपर सचिव आबकारी द्वारा 24.5.2019 को दाखिल हलफनामे में जिसमें पूर्ण मद्यनिषेध लागू वाले क्षेत्रो का उल्लेख जैसे बद्रीनाथ,गंगोत्री,यमनोत्री,पूर्णागिरि,रीठा साहेब,हेमकुण्ड साहेब व नानकमत्ता तीर्थ स्थल में सुनिश्चित करें कि इन क्षेत्रों में शराब बंदी कड़ाई से लागू हो

परन्तु सरकार ने इसके विपरीत काम किया है कि लॉक डाउन के दौरान शराब की दुकानें पृरे उत्तराखंड में खोल दी हैं। ऐसे में न केवल कोरोना महामारी में संक्रमण फैलने का खतरा पूरे पर्वतीय ग्रामीण क्षेत्रो में हो गया है बल्कि 40 दिनों से शराब से मुक्ति पा चुके लोगो को सरकार ने पुनः नशे की ओर धकेलने का काम किया है

नशा नही रोजगार दो आंदोलन के प्रखर नेता व उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी सी तिवाड़ी ने कहा कि सरकार प्रदेश की गरीब जनता का हित नही चाहती है उसे केवल शराब लॉबी को लाभ पहुचाने की चिंता है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की आवाज को कुचलने का कार्य कर रही है जिसका स्पष्ठ उदाहरण देवाल में ब्लॉक प्रमुख की गैर कानूनी गिरफ्तारी है।

वीसी में मुंबई महाराष्ट से सामिल हुए गरुड़ निवासी केवलानंद खोलिया ने कहा कि उत्तराखंड प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ पर बहुत कार्य करना जरूरी है वहा शराब की बिक्री पर ही केंद्रित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उत्तराखंड महिला मंच के प्रदेश अध्यक्ष कमला पंत ने सरकार के इस निर्णय को जनता के साथ धोखा बताया। उन्हौने कहा कि शराब से सबसे ज्यादा बर्बादी महिलाओं ने झेली है देव भूमि उत्तराखंड में शराब पूर्ण रूप से बंद होनी चाहिए।

उत्तराखंड हाई कोर्ट में अधिवक्ता डीके जोशी व अधिवक्ता स्निग्धा तिवाड़ी ने सरकार के इस निर्णय को असंवैधानिक करार दिया और सरकार के द्वारा एक ठेके की शराब की दुकान को 2 या 3 ब्यक्तियों को देकर उतनी ही दुकानों को खोलने की अनुमति देना गैर कानूनी ही नही बल्कि जनविरोधी भी है जिसे न्यायालय में चुनौती देना अति आवश्यक बताया।

वीसी में चर्चा का संचालन सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष अधिवक्ता डीके जोशी ने किया।