अब आर पार की लड़ाई ,होगा उग्र आंदोलन

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बंदरों ने उत्पात मचा तोड़ डाले घरों में लगे बिजली के मीटर

  • बंदरों के आतंक से परेशान हैं कत्यूर घाटी के किसान
  • फसलों को पहुंचा रहे नुकसान
  • भगाने पर काटने को आ रहे हैं बंदर
    मुसीबत
    चंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़ तहसील क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में बंदरों ने काश्तकारों के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं।बंदरों का उत्पात आए दिन बढ़ता ही जा रहा है। बंदरों के झुंड ने कई गांवों में उत्पात मचा घरों के बाहर लगे बिजली के मीटर तोड़ डाले।जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान हो गया। बंदरों के आतंक से एक ओर जहां खेती चौपट हो रही है वहीं छोटे बच्चों की सुरक्षा का भी संकट पैदा हो गया है।बंदरों के आतंक इस कदर बढ़ रहा है कि काश्तकारों का खेती से मोहभंग होता जा रहा है।खेतों को नुकसान करने के साथ-साथ बंदर महिलाओं एवं बच्चों पर भी हमले कर रहे हैं।
    तहसील के सिल्ली, मटेना, पाये, दर्शानी, लोहारी, अमोली, जिजोली, नौघर, तैलीहाट, भेटा, जिनखोला, गागरीगोल सहित दर्जनों गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है।इस बीच बंदरों की तादात और भी बढ़ गई है।बंदरों के झुंड ने मटेना गांव में उत्पात मचाकर कई घरों के बाहर लगे विद्युत मीटर तोड़ दिए। जिससे कई घरों की बिजली गुल हो गई और ग्रामीणों को भारी नुकसान हो गया।इसके अलावा बंदरों ने साग-सब्जी और खेती सब चौपट कर दी है। बंदरों का झुंड घरों के अंदर घुसकर सामान ले जा रहा है। बंदरों ने बाजार में दुकानदारों की नाक में भी दम कर रखा है। बंदरों के आतंक के चलते आए दिन प्रत्येक दुकानदार को दो-तीन सौ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। मटेना के ग्राम प्रधान रविशंकर बिष्ट, क्षेपंस भोला दत्त तिवारी, पूर्व ग्राम प्रधान शकुंतला कांडपाल, चंद्रशेखर जोशी, पूर्व क्षेपंस विपिन बिष्ट, उपेंद्र जोशी, पाये की ग्राम प्रधान उमा भट्ट, भेटा के ग्राम प्रधान कृपाल दत्त लोहुमी आदि ने बंदरों के आतंक से निजात न दिलाए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

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