बैजनाथ मन्दिर में साक्षात शिव पार्वती मूर्तिरुप में विराजमान

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देवभूमि उत्तराखण्ड के बागेश्वर जनपद के गरुड़ क्षेत्र में हैं ऐतिहासिक व पौराणिक बैजनाथ मंदिर समूह। दूर दूर से भक्त आकर बाबा बैजनाथ का करते है जलाभिषेक


अपनी विशिष्ट पहचान वाले इस मंदिर में शिव एवं पार्वती के दर्शन एक साथ किये जा सकते  हैं ।इनका निर्माण चंद वंश के समय का बताया जाता है ।उत्तराखण्ड के जनपद मुख्यालय बागेश्वर से 22 किमी की दूरी पर पवित्र गोमती नदी के तट पर स्थित है ऐतिहासिक व पौराणिक बैजनाथमंदिर समूह। यह मन्दिर समूह 9वीं व 10वीं सदी में निर्मित हैं इन मंदिर समूहों की प्रमुखता इनके निर्माण में की गई पत्थरों की नक्काशी का शानदार नमूना है। पत्थरों पर उकेरी गयी शिव पार्वती सहित नंदी, द्वारपाल व अनेकों मूर्तियों को देखकर उस काल की समृद्ध शिल्पकला के दर्शन होते हैं। यहां स्थित सभी मूर्तियां दक्षिण के आग्नेय पत्थर से निर्मित हैं। जिनमें सूर्य कुबेर विष्णु समेत तमाम देवी देवताओं की मूर्तियां हैं। जो कि सातवीं से दसवीं सदी तक की बनी हैं। इस मन्दिर की प्रमुख विषेशता है कि जहां अन्य मंदिरों में शिव लिंग व शक्ति की पूजा होती है वहीं यहां पर साक्षात शिवपार्वती मूर्तिरुप में विराजमान हैं। साथ ही बैजनाथ मंदिर स्थित गोमती नदी पर बने झील में पाली गई मछलियों को दाना खिलाने का अवसर भी यहांआने वाले श्रद्धालुओं को रोमांच से भर देता है। भगवान शिव का प्राचीन मंदिर होने के कारण बैजनाथ आस्था का एक प्रमुख केन्द्र है जिससे यहाॅ आने वालों को एक साथ आध्यात्मिक और ऐतिहासिक लम्हों से रूबरू होने का सौभाग्य प्राप्त होता है ।

रिपोर्ट – जगदीश पाण्डेय (गरुड़) बागेश्वर 9458338181

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