अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया स्वतंत्रता सेनानी अंबादत्त खोलिया ने
…………………………..चंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़……………………………कत्यूर घाटी के जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजों का डटकर मुकाबला किया, उनमें से एक थे अंबादत्त खोलिया।अंबादत्त खोलिया का जन्म कत्यूर घाटी के सिल्ली गांव, पट्टी विचला कत्यूर तत्कालीन जिला अल्मोड़ा ( अब बागेश्वर ) में 17 अगस्त 1917 में जयकृष्ण खोलिया के घर में हुआ था।साल 1929 में जब महात्मा गांधी जी गरुड़ के ऐतिहासिक गांधी चबूतरे पर आए तब गांधीजी की प्रेरणा से युवा अंबादत्त आजादी के आंदोलन में कूद गए।साल 1941 में जब फिरंगी स्वतंत्रता के आंदोलन का जायजा लेने गरुड़ पहुंचे तो अंबादत्त ने उनका डटकर मुकाबला किया।इससे अंग्रेजों के हौसले पस्त हो गए।फलस्वरुप अंबादत्त आजादी का मिशन आगे बढ़ाते रहे।उन्होंने अनेक लोगों को आजादी के आंदोलन से जोड़ा।वर्ष 1941 के व्यक्तिगत आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें 23 फरवरी 1941 को एक वर्ष की कैद व 25 रुपए जुर्माना न देने पर तीन माह कैद की सजा हुई।12 दिसंबर 1941 को इन्हें जेल से रिहा किया गया।इसके बाद भी अंबादत्त के कदम नहीं थमे।उनमें आजादी का गजब का जुनून था।उन्होंने 1942 में गांधीजी द्वारा दिए गए भारत छोड़ो आंदोलन आंदोलन में करो या मरो के तहत संघर्ष और तेज कर दिया।आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें 15 वर्ष की सख्त कैद, 600 रुपए जुर्माना न देने पर ढाई वर्ष और कैद की सजा हुई।साथ ही इन्हें 20 बेंत भी लगे।13 अप्रैल 1946 को उन्हें जेल से रिहा किया गया।उसके बाद भी वे आजादी के लिए रात-दिन लगे रहे।1947 में भारत के आजाद होने के बाद उन्होंने समाज सेवा के अनेक कार्य किए।स्वतंत्रता की लड़ाई में दिए गए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है।