बाल कविता

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खेलें कूदे खूब हम, बिखेरें जिंदगी के रंग।।

खूब मस्तियां हम करेंगे , झूम कर प्राकृति के संग।।

ये सुंदर नदियां हैं ,जो बहती संसार के संग।

जीवन प्राप्ति भी इनसे,खुशियां भी प्रकृति के संग।

ये वन बहुदा ही घिरे,सबका अपना अपना है ढंग।

नील गगन की इस छाया में,सर्प भी करते हैं निद्रा भंग।

मनुष्यों की अपनी दुनिया, परन्तु हो जाता सबका अंत।

जो बिखेरे कृतिया,अमर वही ,वो रहे प्रकृति के संग।

खेतों की नव हरियाली में , सरसों का अपना रंग।

चाँदनी सी बालियों में रहे ,जीवन मेरा प्रकृति के संग।।

नदियों की छल छलाहट है, मधुर वाणी,पक्षियों के कंठ।

सदा रहे यही पर हम,संसार सजाकर प्रकृति के संग।।।।

मेघा पांडेय ग्राम क्षेत्रपाल कक्षा 9 इंटर कॉलेज गागरीगोल

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