कुमाउनी श्रीरामचरितमानस का हुआ लोकार्पण, गरुड़ के साहित्यकार मोहन जोशी की इस उल्लेखनीय उपलब्धि को लोगो ने सराहा

0
769

आज रविवार 23 अगस्त को जिला बागेश्वर के गरुड़ जैसे ग्रामीग क्षेत्र में साहित्यिक जगत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि देखने को मिली है जहाँ आज साहित्यकार मोहन जोशी द्वारा लिखित कुमाउनी रामचरित मानस का लोकार्पण हुआ।

आदर्श ज्ञानार्जन विद्यालय गरुड़ में कुमाऊनी श्रीरामचरितमानस के द्वितीय संस्करण का लोकार्पण कुमाऊँ विकास निगम कुमाऊँ विकास निगम के पूर्व उपाध्यक्ष एवं दर्जा राज्यमंत्री , वरिष्ठ साहित्यकार श्री गोपाल दत्त भट्ट , श्री चंद्रशेखर बड़शीला , श्री मनोज खोलिया, श्री सुरेश चन्द्र जोशी , श्री आनन्द बल्लभ दुबे, भाष्करानन्द जोशी के द्वारा कुमाऊनी रामचरितमानस का लोकार्पण किया गया । इस अवसर पर श्री रमेश चन्द्र फुलारा , भावेश जोशी आदि थे।

श्री मोहन जोशी ने बताया कि श्री रामचरितमानस की कुल 9218 चौपाई तथा :1173 दोहा के साथ ही 87 सोरठा और प्रत्येक काण्ड के पूर्व में श्लोक सहित सभी छंदों का कुमाऊनी में भावानुवाद सन् 2013 पूर्ण हो गया था, जिसका सन 2014 मेे कॉपीराइट भी हो :चुका था । सन 2014 में उत्तराखंड भाषा संस्थान में विज्ञप्ति के आधार पर पुस्तक के प्रकाशन के सहयोग हेतु उत्तराखंड भाषा संस्थान में पुस्तक को भेजा गया था लेकिन अभी तक कोई भी सहयोग व संदेश इस पुस्तक के प्रकाशन हेतु नहीं मिल पाया ।कुल 576 पृष्ठ की इस पुस्तक में 1,33,763 शब्द हैं।

सन 2013 में उसकी दो प्रतियां राष्ट्रपति भारत सरकार महामहिम राष्ट्रपति भारत सरकार ,कॉपीराइट ऑफिस तथा उत्तराखंड भाषा संस्थान को प्रेषित की जा चुकी थी।

मोहन जोशी के द्वारा लिखे गए इस पुस्तक से
सन् 2014 में कौसानी में प्रणाम आश्रम में सरस्वती मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर इसके पाँचवे सोपान कुमाऊनी सुंदरकांड का पाठ कौसानी और गरुड़ के लोगों के द्वारा किया गया, इसके पश्चात गरुड़ में घिंघेश्वर मंदिर (सिल्ली ) में भी कुमाऊनी सुंदरकांड का पाठ किया गया तथा आदर्श ज्ञानार्जन विद्यालय में भी विद्यार्थियों के द्वारा कुमाऊनी सुंदरकांड का पाठ किया गया।
अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा श्री रामचरितमानस की इस अनुपम रचना कृति ग्रामीण भाषा अवथी में की गई ।
इसके मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए कुमाऊनी भाषा में प्रत्येक पंक्ति का यथावत भाव रखते हुए कुमाऊनी भाषा में अनुवादित करने का प्रयास किया गया है ,जो कि कुमाऊं के कुमाऊनी भाषी क्षेत्र के लिए इस संपूर्ण मानस के मूल भाव की सहज ग्राह्यता संभव है।

पुस्तक के रचनाकार का पत्राचार का पता है मोहन जोशी ‘ मोहन आश्रम ‘ दर्शानी, गरूड़, बागेश्वर, उत्तराखण्ड। दूरभाष-96907 80057

Download Garur Patrika App

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें