19 साल के उत्तराखंड में अहम मुद्दे जैसे राजधानी,बन नीति, खनिज नीति;रोजगार,आबकारी नीति; शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार,पलायन,जंगली जानवर व बंदरो का आतंक;शराब व नशे से बर्बादी;भाषा,संस्कृति व साहित्य संवर्द्धन;जिला विकास प्राधिकरण आदि ज्वलंत मुद्दों पर आगामी 29 दिसम्बर 2019 रविवार को महासम्मेलन होने जा रहा है जिसमे उत्तराखंड के ज्वलंत मुद्दों पर विचार मंथन व उन पर प्रभावी रणनीति तैयार करने हेतु मिलजुल एक ताकत बनाने की योजना है।
इस कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अधिवक्ता डी के जोशी ने गरुड़ पत्रिका को अवगत कराया कि प्रदेश के विशेष रूप से पहाड़ी जिलों की ज्वलंत समस्याओं पर मैदानी क्षेत्रों में ए सी (वातानुकूलित) भवनों में बैठकर नीति बनाना छोड़ देना होगा इसके लिए गांव पहाड़ में ही एकजुट होकर पहाड़ के मुद्दों पर चर्चा करने का समय आ गया है , श्री जोशी में कहा कि देहरादून व दिल्ली में बैठकर बनाई गई कोई भी नीतियाँ उत्तराखंड के लिए आज तक कारगर साबित नही हुई है जिसका मुख्य कारण है नीतिनिर्माताओं जो पहाड़ के लिए मैदान में बैठकर नीति बना रहे है उन्है खुद पहाड़ की समझ ही नही है इस लिए इनके द्वारा बनाई गई सभी नीतियां फेल हो रही हैं।
आगामी 29 दिसम्बर को गरुड़(बागेश्वर) में आयोजित होने वाले इस महासम्मेलन(गरुड़ सम्मेलन) में सभी जन संघर्षशील ताकतों से एकजुट होने का आह्वान किया गया है ।