Uncategorizedसाहित्य एवं कलाहिंदी कविता “गाँव” द्वारा Om prakash Fulara - November 24, 2019 0 233FacebookXPinterestWhatsApp चल गाँव चलें।तरु छाँव चलें।। नित प्यार रहे। जल धार बहे।।बहती ममता। रहती समता।। सब एक बनें। नित प्रेम जनें।।हरती दुख है भरती सुख है। यह भूमि हरी। रस प्रेम भरी।।ओम प्रकाश फुलारागरुड़ बागेश्वर Download Garur Patrika App