Uncategorizedगाँव द्वारा Om prakash Fulara - September 10, 2013 0 283FacebookXPinterestWhatsApp चल गाँव चलें। तरु छाँव चलें।। नित प्यार रहे। जल धार बहे।।बहती ममता। रहती समता।। सब एक बनें। नित प्रेम जनें।।हरती दुख है भरती सुख है। यह भूमि हरी। रस प्रेम भरी।।ओम प्रकाश फुलारा Download Garur Patrika App