मैं भोर पे शहीद हूं:::::::::::::::
मैं चल पड़ा उन राहों पेजिन राहों का फकीर हूं
किस्मत के माथे पर पड़ी बदनाम सी लकीर हूं
मैं जल रही मशाल सीमैं जल रही उम्मीद हूं
चमक उठा हूं पूर्व पेअस्तित्व जिसका भोर पे
मैं भोर पे शहीद हूं।
हंस का वो अंश लिए रागिनी से लड़ने मैं रात की वो रेत पेलिखे जो नाम पढ़ने मैंडर है अंधेरे से मुझेजबकि रोशनी का मीत हूंचमक उठा हूं पूर्व पेअस्तित्व जिसका भोर पेमैं भोर पे शहीद हूं।।खास ना मैं खाक हूंमैं ना रहा जो पाक हूंहूं भस्म क्या मैं स्वर्ण कीमैं अस्थियों की राख हूंमैं भंग हो चली हूं जैसेचिरकाल की कुरीति हूंचमक उठा हूं पूर्व पेअस्तित्व जिसका भोर पेमैं भोर पे शहीद हूं।।।
गौरव पुरीकक्षा – 11 खोलिया विवेकानंद इका गरुड़,बागेश्वर)
गरूड़ पात्रिका के सफल संचालन हेतु हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामना , गौरव पुरी के उज्ज्वल भविश्य हेतु शुभकामनाएं