चंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़कत्यूरी राजाओं की राजधानी रहे गरुड़ में गोमती व गरुड़ गंगा के संगम पर स्थित चक्रवर्तेश्वर मंदिर लाखों लोगों की अगाध श्रद्धा व अटूट आस्था का प्रतीक है।यहां पूजा अर्चना करने से मन्नत पूरी होती है।नवरात्र व श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।……………………इतिहासमान्यता है कि इसी स्थान पर मां ने असंख्य भंवरों का रुप धारण करके अरुण दैत्य का संहार किया था।पूर्व में जब कत्यूर घाटी जलमग्न थी, उस दौरान यहां पर चक्रवर्ती दैत्य अरुण निवास करता था।जब कत्यूरी राजा आसन्तिदेव व वासन्तिदेव यहां राजधानी बनाने पहुंचे तो उनका अरुण दैत्य के साथ युद्ध हो गया।तब मां ने असंख्य भंवरों का रुप धारण करते हुए अरुण नामक दैत्य का संहार कर दिया।तभी से यह स्थान चक्रवर्तेश्वर कहलाया।1942 में महादेव गिरी बाबा ने यहां आकर मंदिर को भव्य रुप प्रदान किया।वर्तमान में गड़सेर, हाल निवासी हल्द्वानी दानवीर चंद्रशेखर मिश्र ने मंदिर का जीर्णोद्धार कर मंदिर को भव्य व आकर्षक बनाया है।……………………..आयोजनयूं तो वर्षभर श्रद्धालु मंदिर में आकर मन्नतें मांगते हैं, लेकिन श्रावण मास व नवरात्र में पूजा पाठ के लिए यहां भारी भीड़ लगती है।यहां समय-समय पर कथाएं व अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं।……………………………..चक्रवर्तेश्वर मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है।यहां जो भी भक्त पहुंचते हैं, उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।मंदिर परिसर में अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं।जो भी भक्त यहां सच्चे मन से पूजा करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है।नवरात्र व श्रावण मास में यहां काफी भीड़ रहती है।