शराबबंदी आंदोलन के सूत्रधार थे स्वतंत्रता सेनानी स्व. दीवान सिंह नेगी

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चंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़
भारत के स्वाधीनता आंदोलन में कत्यूर घाटी के अनेक सेनानियों ने भाग लिया।इन्हीं सेनानियों में से एक थे – स्व. दीवान सिंह नेगी। जनपद बागेश्वर की कत्यूर घाटी के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी स्व. दीवान सिंह नेगी का जन्म 13 अगस्त 1919 को ग्राम सिल्ली, पट्टी विचला कत्यूर, तत्कालीन जिला अल्मोड़ा में श्री चंद्र सिंह के घर मे हुआ था।
दीवान सिंह कत्यूर के प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी स्व. जयबल्लभ ममगाई के संपर्क में आए और कांग्रेस की बैठकों में भाग लेने लगे।उनका हृदय देश की आजादी की भावना से ओतप्रोत हो गया। वे आजादी के एक साहसी सिपाही के रुप में पहचाने जाने लगे।साल 1942 में उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रुप से भाग लिया।जिसके कारण उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 436 के तहत 6 वर्ष का कठोर कारावास तथा 100 रुपए के जुर्माने की सजा दी गई।
देश की आजादी के बाद दीवान सिंह नेगी सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता बन गए, किंतु शीघ्र ही दलगत राजनीति से उनका मोह भंग हो गया।फलतः वे राजनीति से हटकर महात्मा गांधी और विनोबा भावे के रचनात्मक कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार में जुट गए।गरुड़ में चले शराबबंदी आंदोलन के वे प्रचंड सूत्रधार थे।वे कहा करते थे शराब पहाड़ की महिलाओं की पीड़ा का एक प्रमुख कारण है।शराब की भट्टी हटने के बाद गरुड़ बाजार में उसी स्थान पर उन्होंने कत्यूर ग्राम स्वराज्य मंडल नामक संस्था की स्थापना की, जिसके वे जीवन पर्यंत मंत्री रहे।वे ताउम्र सामाजिक बुराइयों, कुरीतियों और अंधविश्वासों से संघर्ष करते रहे।उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग द्वारा लोगों को रोजगार देने का काम किया।
दीवान सिंह नेगी एक कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता थे।बच्चे और बूढ़े सभी उन्हें ” दीवानदा” कहकर पुकारते थे।जंगलों के अवैध कटान के खिलाफ वे आवाज उठाते थे।वन संरक्षण, वन संवर्धन के लिए वे समर्पित थे।गढ़वाल में चले चिपको आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रुप से भागीदारी की थी।
कृषि व बागवानी के वे प्रकांड पंडित थे।कंपोस्ट एवं गोबर की खाद जे द्वारा उन्होंने कई वर्षों तक अच्छी फसल पैदा की।मटेना, जिनखोला, गड़सेर, सिल्ली, गागरीगोल आदि गांवों में जाकर उन्होंने कई किसानों को प्रेरणा दी। 25 दिसंबर 1994 को उन्होंने अपने जीवन की अंतिम सांस ली।गरुड़ पत्रिका उन्हें शत-शत नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती है।

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