गरुड़ जुटो ददा हो तारीखा उन्तीस।
हलै हल फरक द्यखो बीसा का उन्नीस।।
तारीखा उन्तीस ………..।। भौत थै है आब् नि थाइन रोजै दिक्खदारी।
बानरों शरण ल्हैगेछ सारी फसल हमारी।
धुसन स्यारी कैं देखि मन में लागणेंछ टीस।……. कम्बी छुटन है गीना ज्वान नौनिहाल रूँङतुँङ।
नश्श में चुरीन याँका बाट -बाटी का ढुँङ – ढुँङ।।
शरम लाज पलि चुट्यै , समाई एक्की रीस।…… बाघ गुणि बरहा अलग डौंरीं री आपण बाट।
ठाड़ करण पै लागि रींना यौं सब्बै हमरी खाट।।
स्वैंणा लै सुख नैं स्योव रोजै देखिणई खबीस।।….. पैली रैली जोरदार , फिर हल विचार।
कागजों में लेखि जाला सोचिया उरातार।।
भ्रामरी माता दैंण हैजों, दैणा जगदीश।।
तारीखा उन्तीस…………..::।। मोहन जोशी