आजादी के लिए उत्तराखण्ड से सबसे पहले जेल गए मोहन सिंह मेहता

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निर्भीक व साहसी थे स्वतंत्रता सेनानी मोहन सिंह मेहता
  • चंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़स्वतंत्रता सेनानी मोहन सिंह मेहता का जन्म 1897 में ग्राम छटिया, स्याली टीस्टेट ( डंगोली के पास ) मल्ला कत्यूर तत्कालीन जनपद अल्मोड़ा ( अब जनपद बागेश्वर, तहसील गरुड़ ) में हुआ था।मोहन सिंह मेहता एक संपन्न जमीदार घराने में जन्म लेने के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम के अत्यंत कष्टदायी रास्ते पर चल पड़े।वे मोतीराम तिवारी के बाद कत्यूर घाटी में आजादी के लिए आंदोलन की अलख जगाने वाले प्रमुख सेनानी थे।वे आजादी के अत्यंत निर्भीक व साहसी सिपाही थे।उन्होंने 1921 के असहयोग आंदोलन में सक्रिय रुप से भागीदारी की।जिसके कारण उन्हें मार्च 1921 में नौ माह कैद और 100 रुपए जुर्माने जी सजा दी गई।वे आजादी की लड़ाई में उत्तराखंड से जेल जाने वाले पहले सेनानी थे।वर्ष1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें आठ माह की कड़ी कैद तथा 50 रुपए जुर्माने की सजा दी गई।आजादी के बाद वे 1957 से 1967 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे।उनके सम्मान में उत्तराखंड सरकार ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ का नाम मोहन सिंह मेहता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ रखा है।भले ही वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन देश की आजादी के लिए उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।
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