कत्यूर घाटी के प्रथम विद्यालय की बदहाली

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रिपोर्ट जगदीश पाण्डेय बागेश्वर 9458338181

आज भारत वर्ष में शिक्षा को बढ़ाने को लेकर कई योजनाये बनाई जा रही है । मगर हमारी राष्टीय धरोहर किस तरह से बदहाल है और यहाँ अंग्रेजों के जमाने से बने कत्यूर घाटी का प्रथम विद्यालय किस तरह बदहाली के आंसू रो रहा है पेश है
एक रिपोर्ट —

बागेश्वर जनपद के वज्यूला में अंग्रेजों के जमाने में उस अंगेजी सरकार के समय बागेश्वर के क्रांतिकारियों के प्रयास से वज्यूला में विद्यालय की
स्थापना की गयी जिससे की यहाँ के आम आदमी तक शिक्षा ब्यवस्था का लाभ मिल सके ! बागेश्वर जनपद का यह बिद्यालय अपने आप में प्रथम बिद्यालय भी है !

https://youtu.be/Y3lM3kYp9s0

जहा पर विद्यालय के साथ साथ हॉस्टल सुविधा भी थी ! भारत को आजाद होने के बाद इस विद्यालय की स्थति में सुधार आने के बजाय आलम ये हुआ की यह विद्यालय आज चल तो रहा है मगर जीर्ण शीर्ण हालत में है ! विद्यालय में न ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए उचित ब्यवस्था है और ना ही बच्चों के खेलने के लिए प्रांगण !

यूँ तो आजादी के बाद कितनी ही सरकारें आई और गयी मगर किसी ने भी बागेश्वर के इस धरोहर को बचने में प्रयास तक नही किये ! जबकि इस विद्यालय के पास पचास नाली जमीन है जिसमे कई नए भवन बनाये जा सकते है और बच्चों के
खेलने के लिए भी बड़ा मैदान बन सकता है मगर प्रसासन की अनदेखी कहे या सरकार की लापरवाही ! नए भवन की बात तो दूर की जो भवन अंग्रेजों ने बनाये थे शिक्षा ब्यवस्था को सुधरने के लिए उसे तक हमारी सरकारें और प्रसासन बचा नही सकी आलम ये हुआ की यहाँ पर जो आजादी के पूर्व में बने भवन और आवाशीय भवन और देख रेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुके है !और विद्यालय प्रांगण में बिजली के तारे भी लटक रही है जिसपर भी यहाँ के अधिकारीयों को जानकारी देने के बाद भी आज तक हालत ज्यूँ की ट्यू है !

यहाँ के लोगों से बात करने पर उनका कहना है की कई बार हमने इस सम्बन्ध में शासन के उच्च अधिकारिओं और सरकार को जानकारी दे दी है मगर आज तक कोई कारवाही नहीं हुई !

अब इससे अंदाजा लगाया जा सकता है की हमारी सरकारें हमारे मूलभुत आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में कितना काम कर पायी है

गरुड़(बागेश्वर) से जगदीश पाण्डेय की रिपोर्ट

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