चलना है
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निश्चित लक्ष्य तुझे मिलना है।
पथिक तुझे अथक चलना है ।।
भेद निशाना जो प्रण ठाना, फल तेरा जाना पहचाना ।। विजय ताज मस्तक पर निश्चित निश्चय कर तूने है पाना।।।
रोकेगी क्या तुझको बाधा।
लाँघ लिया जब रस्ता आधा।
सीना तान प्रस्तर कर काँधा।
चाहों को है क्यों कर बाँधा।।
होगी कभी व्यथा ना पूरी।
जीवन की हर गाथा अधूरी।।
पछता कर हाथों को मलना है।
क्या निश्चित काँटों में पलना है।।
पथिक अभी तुझे चलना है।
पल – पल वक्त यों ही ढलना है
जैसे दीपक चीर अंधेरे
जले नित्य तुझे जलना है।।
तूफानों का कर आलिंगन बना अडिग निडर यह जीवन।। कदम बढ़ा हर दम निज हर क्षण। कर कठोर यह संकल्पित मन ।।
भोर किरण आनी ही आनी।
निश्चित निशा जानी ही जानी।।
गंगा में जिस तरह रवानी।
अविरल बहता है ज्यों पानी।।
पल – पल ही बहते रहना है।
पथिक तुझे चलते रहना है।।
सर्दी गर्मी को सहना है।
अडिग अभय सदा रहना है।।
रुकी नहीं हवा ज्यों अब तक।
ठहरा ही तू रहें क्यों कब तक।।
दुःखी तुझे यों नहीं रहना है।
अब साहस ही तेरा गहना है।।
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मोहन जोशी
बहुत सुंदर