हिंदी कविता “क्षणिका”

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क्षणिका इस बेजान सड़क ने
देखी हैं जीवित पीढियां
खुद से गुजरते हुए
सड़क चिरंजीवी ,
जो निर्जीव
वो सदा
जो सजीव
वो ओझल हुआ डाॅ, हेमचंद्र दुबे
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