कत्यूर के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मनोरथ दूबे
कत्यूर के स्वतंत्रता सेनानीस्वतंत्रता के कर्मठ सिपाही थे मनोरथ दुबेचंद्रशेखर बड़सीला, गरुड़कत्यूर घाटी ने आजादी के आंदोलन के दौरान ऐसे सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।इन्हीं सेनानियों में से एक थे- स्व. मनोरथ दुबे।उनका जन्म 1919 में ग्राम सिल्ली , गरुड़, पट्टी बिचला कत्यूर तत्कालीन जिला अल्मोड़ा ( अब बागेश्वर ) में हुआ था।उनके पिता का नाम धनी राम था।वे स्वतंत्रता संग्राम के कर्मठ एवं सक्रिय कार्यकर्ता तथा वीर सेनानी थे।जिस स्थान पर आज ऐतिहासिक गांधी चबूतरा है, वहां पर एक टीलानुमा स्थान हुआ करता था।मनोरथ दुबे उस स्थान पर लोगों को एकत्रित कर आजादी की अलख जगाते थे।उनकी प्रेरणा से कई लोग आजादी के आंदोलन में कूद गए।वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें 6 वर्ष 6 माह के कठोर कारावास की सजा हुई।200 रुपए जुर्माना न देने पर एक वर्ष का कठोर कारावास हुआ।उन्हें लखनऊ जेल में रखा गया।आजादी के बाद भी वे समाज सुधार के कार्यों में लगे रहे।उनके पुत्र जीवन चंद्र दुबे वर्तमान में बागेश्वर के खंड शिक्षाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।देश की स्वतंत्रता में उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा।