‘दहशत’

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अब पहाड़ो पर
नहीं सुनाई देती
करुण पुकार
क्योंकि यहां
पग-पग पर
घूमते दरिंदे भेड़िये ।
दहशत फिर से
याद दिलाती है
वह घटना ।
वह जो पिरोती
माला अपने
घर बसाने की
उसे जबरदस्ती
जलाया गया
हवस की आग में । ✍मनोज कुमार खोलिया, गरुड़, बागेश्वर।
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