‘ हौसले ‘
……..
हौसले जिन्दा रखते हैं घबरना मार जाता है।
तिनके के सहारे डूबता भी पार जाता है।।
इरादे नेक होने चाहिए जीवन सँवरने को।
निशाने के बिना हर तीर भी बेकार जाता है।।
जिन्दादिल ही अकसर जीत जाते हैं सदा बाजी।
बुझदिल और बेदम तो सदा ही हार जाता है ।
नफरतों ने दुखी कर डाला है लोगों को जिन्दगी भर।
तिजोरी में सदा दिल के सम्हाला प्यार जाता है।।
पर उपकार करके देखिए दिल मुस्कुराएगा।
करम अच्छा अगर हो एक ही उबार जाता है।।
देश रक्षार्थ जीवन को लगाते वीर सीमा पर।
हजारों भीड़ में ‘ मोहन ‘ कोई दो – चार जाता है।।
…………………………………….
मोहन जोशी, ‘मोहन-आश्नम’, दर्शानी,
गरुड़, बागेश्वर, उत्तराखण्ड।