न्याय सबके लिए – समान न्याय व निःशुल्क क़ानूनी सहायता

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भारतीय संविधान  के 42वे संसोधन 1976 के उपरांत अनुच्छेद 39(क) जिसमें समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान किया गया है में यह प्रावधान है कि “राज्य यह सुनिस्चित करेगा कि विधिक तंत्र इस प्रकार काम करे कि समान अवसर के आधार पर न्याय सुलभ हो और वह, विशिष्टतया, यह सुनिशित करने के लिए कि आर्थिक या किसी अन्य निर्योग्यता के कारण कोई नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित ना रह जाए, उपयुक्त विधान या स्कीम द्वारा या किसी अन्य रीति से  निःशुल्क विधिक सहायता की व्यवस्था करेगा” 

उपरोक्त लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु 1987 में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 बनाया गया जिसके तहत राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्य के अंतर्गत राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण व तहसील विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से समान न्याय व निःशुल्क क़ानूनी सहायता प्रदान करने की व्यवस्था लागू कर दी गयी। 

निःशुल्क क़ानूनी सहायता (बिना किसी आय सीमा के) प्राप्त करने वाले व्यक्तियों में अनुसूचित जाति व जनजाति के सदस्य, महिला व बच्चे, दिव्यांग अथवा मानसिक रोगी, औद्योगिक कर्मकार (वर्क्मेन), सेवानिवृत्त कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिक, आपदा – बाढ़, भूकम्प, दंगे आदि से पीड़ित व्यक्ति, HIV-AIDS प्रभावित व्यक्ति, ट्रान्सजेंडर, देह व्यापार अथवा बेगारी से पीड़ित व्यक्ति, न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे व्यक्ति आदि-आदि शामिल हैं। 

ऐसा नहीं है कि उपरोक्त श्रेणी से बाहर के व्यक्तियों के लिए निःशुल्क क़ानूनी सहायता का प्रावधान नहीं है बल्कि ऐसे समस्त व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय रु 3 लाख अथवा उससे कम हो को भी तहसील स्तर से ले कर ज़िला न्यायालय, उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक निःशुल्क क़ानूनी सहायता प्राप्त करने का अधिकार है। 

उत्तराखंड में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ADR सेंटर उच्च न्यायालय नैनीताल परिसर में स्थित है जिसका सम्पर्क दूरभाष 05942-236552 है जबकि जिले स्तर पर प्रत्येक ज़िला न्यायालय में ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण गठित हैं, साथ ही प्रत्येक तहसील स्तर पर भी निःशुल्क न्याय मुहैया कराए जाने हेतु तहसील विधिक सेवा प्राधिकरण का भी गठन किया गया है।

Official Website of Uttarakhand State Legal Services Authority (http://slsa.uk.gov.in/)

जानकारी व जागरूकता के अभाव में आर्थिक रूप से कमज़ोर व विभिन्न श्रेणी जिनका ज़िक्र पूर्व में ही किया जा चुका है से जुड़े हुए व्यक्तियों तक विधिक सेवा प्राधिकरण की योजनाओं का लाभ अपेक्षित संख्या तक नहीं पहुँच पाता है। अतः ज़रूरत इस बात की है कि समय समय पर “न्याय सबके लिए” के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदत्त निःशुल्क क़ानूनी सहायता की योजना का वृहद स्तर पर प्रचार प्रसार हो ताकि आर्थिक या किसी अन्य निर्योग्यता के कारण कोई नागरिक न्याय प्राप्त करने के अवसर से वंचित ना रह जाए।

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